जैविक प्राकृतिक खेती यानि जीवाणु के द्वारा खेती
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| जैविक प्राकृतिक खेती (Organic Natural Farming) |
जैविक प्राकृतिक खेती और जैविक खेती दोनों में बस एक अंतर हैं, वो यह की जैविक खेती में भूमि को जोतना पड़ता हैं, लेकिन जैविक प्राकृतिक खेती में नहीं| बाकि सब एक समान कार्य होते हैं| जैविक प्राकृतिक खेती (Organic Natural Farming) में ऐसे कार्य करने होते हैं जिसमे प्रकिती ही ज्यादा से ज्यादा कार्य करें और मनुष्य का कार्य कम हो| इसमें मुख्य भूमिका जीवाणु ही कार्य करते हैं| भूमि में जीवाणु की संख्या जितनी अधिक होगी उतना ही खेती आसानी से होगी और अच्छा उत्पादन मिलेगा|
जीवाणु के द्वारा खेती: यह भारत देश का वरदान हैं की यंहा मूल गायें यानि देशी गायें के गोबर में, मूत्र में, दूध में, दही में और उनके कार्यो से वो सब बैक्टीरिया उत्पन्न होते हैं जो पौधों को पोषक तत्व प्रदान करते हैं, ताकत देते हैं और वायरस से बचाते हैं| मिट्टी में अरबों की संख्या में सूक्ष्म जीवाणु पाए जाते हैं किसी भी प्रकार के फसल के विकास में सूक्ष्म जीवाणुओं का योगदान बहुत अधिक होता है | बिना सूक्ष्म जीवाणुओं के फसल को खाद मिलना संभव ही नहीं है |
धन्यवाद करता हूँ की "बंशी गिर गौशाला" जिन्होंने गिर गायो के गोबर, मूत्र, दूध और दही में मौजूद जिवानुओ की खोज की, उनकी उपयोगिता को समझाये और गौ-कृपा अमृतम किसानों को दिए और चमत्कारिक रूप से उनकी खेती का उपज बढ़ा, कोई वायरस का प्रकोप नहीं| उनकी खोज में प्राप्त जीवाणु को समझते हैं|
हमे समझना होगा की हमारा कृषि गौ-आधारित होना चाहिए, तभी हम किसान जैविक प्राकृतिक खेती (Organic Natural Farming) यानि जीवाणु के द्वारा खेती कर सकते हैं|
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Krishi Darshan

