कृषि दर्शन: सरल, सफल और समृध्द खेती कैसे करें?
कृषि दर्शन: अभी पुरे भारत वर्ष में जैविक खेती, यौगिक खेती, प्राकितिक खेती का प्रचार, प्रशिक्षण, सम्मेलन और YouTube के द्वारा बातें बताई जा रही हैं| इसमें सरकार, संस्थाएं और किसान बहुत उत्साह से जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा हैं| कई विशेषज्ञों जैसे श्रीमान तारा चंद बेलजी , श्रीमान गोपाल सुतरिया श्रीमान सुभाष पालेकर ने किसानों को कृषि, गौ- माता और भारत संस्कृति को बहुत सरल रूप से समझाया और सिखाया गया हैं| आज वो सब किसान कम लागत में उत्तम फसल, ज्यादा पैदावार और पोषक तत्व से भरपूर फसल प्राप्त कर रहे हैं|
यदि कृषि का ज्ञान लेना चाहते हैं उनके नाम को क्लिक करें आप उनका विडियो से सिख सकते हैं| यह लेख इन्ही के ज्ञान को मथन करके लिखा गया हैं|
सरल, सफल और समृध्द खेती कैसे करें?
जैविक प्राकितिक खेती करने के लिए पांच बातों पर ध्यान देना होगा:-
- गौ-पालन करना: गाय शब्द का अर्थ हैं "देशी गाय: से होगा| जंहा गाय आनन्द रूप से घुमती हैं, सेवा किया जाता हैं, सम्मान दिया जाता है, वंहा 38 कोटि की देवता विरमान होता हैं, उनसे मिलने वाले लाभ अनंत हैं| बस इतना जान ले, इनके बिना कोई कृषि नहीं की जा सकती हैं| तो अपने यंहा जगह से दे| सम्मान से रखें|
- जीवाणु की संख्या: जो किसान अपने खेत में रसायनिक उर्वरक और कीटनाशक डालते हैं, उनके खेत की मिट्टी में जीवाणु की संख्या बहुत कम या न के बराबर हो जाती हैं| एक जैविक खेत के 1 ग्राम मिट्टी में 40 लाख से लेकर 2 करोड़ तक जीवाणु होते हैं| जितनी अधिक जीवाणु वो खेत उतना ही अच्छा उत्पादन देगी| यह जीवाणु सिर्फ देशी गाय के गोबर में, मूत्र में, दूध में, दही में और घी में विधमान होती हैं, यह असंख्य और कई प्रकार के जीवाणु विद्यमान होते हैं, जो पौधों सलत रूप से खाना और ताकत देती हैं| यदि यह जिबाणु न रहे तो तो हमारी फसले कमजोर होगी, उत्पादन कम होगा, वायरस प्रकोप ज्यादा आएगा, खरपतवार ज्यादा उगेंगे| जीवाणु ही पौधों को खुराक देती हैं, ताकत देती हैं, वायरस और रोग से बचाती हैं|
- जैविक खाद क्या हैं?: जैविक चीजो से यानी गोबर, पुआल, सुखी पत्तियां आदि को जीवाणु के द्वारा या केचुआ के द्वारा जो खाद बनती हैं वो जैविक खाद होती हैं, यह धीमी और ठंडी प्रकिया के द्वारा बनती हैं, इसमें पोषक तत्व नस्ट होती हैं और पौधों को पक्का हुआ यानि जैविक खाद प्राप्त होती हैं| यह खेतो की मिट्टी को मुलायम बनाती हैं, जीवाणु को रहने और खाना देती, यह जल धारण करने की शक्ति प्रदान करती हैं, केचुआ को बढ़ावा देती हैं, पौधों को पोषण देती हैं और यह किसान या जैविक खाद निर्माता अपने नजदीक में मिलने वाले संसाधनो से उत्तम और सस्ता खाद बना सकती हैं|
- किट और वायरस से बचाव: जब किसान जीवाणु के द्वारा अपने घर पर ही किट नाशक तैयार कर सकते है और हर दस दिन में उपयोग करते रहना हैं, जिससे बहुत किट आयेंगे और मांसाहारी किट फसलो को नुकसान करने वाले कीटो को खाकर उसकी संख्या नियत्रण करेगी| गौमाता की गोबर में कई ऐसे जीवाणु भी जो वायरस को नियत्रण में रखते हैं|
- सिचाई: ऊपर दिए हुए सभी बातो पर अमल करते हैं, तो आपको सिचाई में लगने वाली जल मात्रा 40 % तक घट जाती हैं| यदि जल से साथ जीवाणु और तरल खाद छोड़ते हैं तो यह सोने par सुहागा हो जाता हैं|
इस तरह से आप जैविक प्राकितिक खेती कर सकते हैं, यह सिर्फ कुछ शब्दों में समझाने की कोशिश किया गया हैं| यह जितना आप समझेंगे उतना ही सरल, सफल और समृध्द खेती कर पाएंगे|
आशीष बरनवाल
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Krishi Darshan
