जैविक खाद: नाडेप खाद (Nadep Compost)

 जैविक खाद: नाडेप खाद (Nadep Compost) 

जैविक खाद: नाडेप खाद (Nadep Compost) 

नाडेप खाद (Nadep Compost):

जैविक खाद के तौर पर नाडेप खाद बनाने की प्रकिया,  महाराष्ट्र के रहने वाले प्रगतिशील किसान श्री नारायण देवराव पण्ढ़री पांडे के द्वारा विकसित किया गया था| जिसको संक्षिप्त में नादेप और अँगेजी में नाडेप कहते हैं| इस प्रक्रिया में एरोबिक जीवाणु के द्वारा किया जाता हैं| 

Nadep Composting का उद्देश्य:

  • जैविक उर्वरक तैयार करना
  • रसायनिक उर्वरक को घटाना
  • मिट्टी की जल धारण की क्षमता को बढ़ाना
  • घर व् कृषि अपशिष्ट उपयुक्त और प्रभावी उपयोग करना
  • मृदा में सूक्ष्मजीवो की संख्या को बढ़ाना
  • उर्वरक में खर्च कम होना 
  • पर्यावरण का सरंक्षण
  • कम जगह में ज्यादा खाद बनना
  • कम मेहनती और देखभाल होना

नाडेप खाद बनाने की समाग्री:

  • कृषि अपशिष्ट हरा-सुखा (फसल अवशेष, खरपतवार, घास): 1400 - 1600 Kg
  • गोबर 100 - 120 Kg 
  • खेत की मिट्टी 1000 -2000 Kg 
  • पानी 1500 -2000 litter

नाडेप खाद (Nadep Compost)

नाडेप खाद का ढांचा (टांका) बनाने की विधि:

ढांचा (टांका) बनाने की समाग्री: ईट 800-1000, सीमेंट 50 Kg, रेत 100-120 kg, मोरंग 100 kg

समतल जमीन पर 10 फीट लम्बा, 6 फीट चौड़ा, 3 फीट ऊँचा कुल 180 घनफीट का आयताकार जालीदार ढांचा, जिसमे ऊपर की दो लाइन और निचे की दो लाइन ईटो को छोड़कर बीच की अन्य लाइनों में एक के बाद एक छोड़कर 6 से 7 इंच का जालीदार छेद बनाया जाता हैं, जिससे नाडेप खाद बनाने का ढांचा बनकर तैयार हो जाता हैं |

ढांचा (टांका) की भराई करना:

पहला कार्य: 15 किलो गोबर, 15 किलो  मिट्टी को 25 लीटर पानी में घोल तैयार करना हैं और उसे ढांचा के दीवारों को और सतह को लेप करना हैं|
दूसरा कार्य: 6 इंच का सुखा फसलो का अवशेष बिझाना हैं, उसके ऊपर 4 इंच का हरा घास या खरपतवार छोटे टुकड़े ढालना हैं, फिर इसको गोबर के घोल से भिगाना हैं उसके उपर 1 इंच का मिट्टी का परत भिझाना हैं| इसी तरह 10 से 12 बार करना हैं| अंत में गोबर और मिट्टी का मिश्रण से ऊपर थोडा गोल आकार का लेप से बंद कर देना हैं|
तीसरा कार्य: 10 से 15 दिनों के बाद यह लगभग 1 फीट निचे दब जायेगा| उसके बाद दरारे आ जाती हैं| आपको पुनः कार्य 2 को करना होगा|
चौथा कार्य: 60 से 70 दिन के बाद राईजोबियम, पी. एस. बी. और एज़ेटोबैक्टर का कल्चर घोल, छिद्रों को बनाकर अन्दर डालना चाहिए| 

नाडेप खाद का उत्पादन और प्रयोग विधि:

लगभग 90 से 100 दिन के बाद अच्छी पक्की हुई जैविक खाद बनकर तैयार हो जाती हैं| करीब 3 टन जैविक खाद प्राप्त होती हैं| इसका प्रयोग, बुआई या रोपाई से 15 दिन पहले 3.5 से 5 टन नाडेप खाद प्रति हेक्टेयर डालकर जुताई कर देना चाहिए| 

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